इस मर्तबा हमने

इस मर्तबा हमने,
फिर से किया प्रेम
कल भी किया था
जब बात कुछ और थी
क़शिश, कल्पना और प्रतिभा की

इस मर्तबा हमने
फिर से देखा उन्हें
कल भी देखा था
जब बात कुछ और थी
चंचलता, मासूमियत और निगाहों की

इस मर्तबा हमने
फिर से किया स्पर्श
कल भी किया था
जब बात कुछ और थी
सम्मान,अधिकार और अनुभूति की

इस मर्तबा हमने
फिर से किया अवलोकन
कल भी किया था
जब बात कुछ और थी
पवित्रता, सम्बन्ध और विश्वाश की …..

9 Comments

  1. RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR RAMAN 04/08/2016
  2. RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR RAMAN 04/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 04/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 04/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 04/08/2016
  4. babucm C.m.sharma(babbu) 04/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 05/08/2016

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