रहने दो

**रहने दे::गज़ल**

यही चाहत का है दस्तूर तो दस्तूर रहने दे,
मुझे बेबस ही रहने दे मुझे मजबूर रहने दे l

तुझे जब याद करता हूं तो दुनिया भूल जाता हूं,
तेरी नश्तर सी यादों से तू मुझको दूर रहने दे l

तू मेरा हो नहीं पाया मुझे ये ग़म नहीं होता,
मै अब भी हूं तेरा तलबी, मुझे गुरूर रहने दे l

ये जब भी साथ होते हैं तो दिल बेचैन होता है,
मेरे ख्वाबों को यूं टूटा औ चकनाचूर रहने दे l

मेरे ग़म छीन मत मुझसे ,मेरे आंसू मुझे दे दे,
रहम कर मेरी गज़लों में ज़रा सा नूर रहने दे l

मुझे ये जब भी चुभते हैं गज़ल होती है “सागर” झूमकर,
मेरे दिल में तेरे वादों का ये नासूर रहने दे ll

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-Er Anand Sagar Pandey

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/08/2016

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