अपने “राम” की बात

मैं का करूँ राम ?.
”हे राम” कहुँ ?
या ”श्री राम” कहुँ·?
या दोहराऊँ ”रामा-राम”?
या फिर सत्य ‘नाम’ है “राम” जिसका.
बस वो ही अपरम्पार ?
फिर ”मैं ” कहाँ राम ?
और कहाँ है ‘वो’ धाम ?

4 Comments

    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 03/08/2016
  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/08/2016
    • अभिनय शुक्ला अभिनय शुक्ला 03/08/2016

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