राह्गीर

आज देख मुसाफिरो की भीड सडक पे,
ख्याल आया क्यो भाग रहे है यह अकड के।

मन्जिल पर तो जाना सभी को है नादान,
लड रहा क्यो यह सोचकर कि बस मै निकल जायू
पह्ले सबसे चाहे हो जाये किसी का नुक्सान ।

चारो ओर कोलाहल मचा रहे होते है होर्न तमाम,
पैदल मुसाफिरो कि तो अटकी रह्ती है जान।

पह्ले हम पह्ले ह्म की होड मे,
सभी फसे रह्ते है जामो के शोर मे।

इस कदर सुसज्जित तक्नीक का ह्म कर रहे है गलत इस्तेमाल,
जिसकी वजह से तो बस बदल गई है सबके हाल – चाल ।

सदमे मे रह्ने लगे है मुसाफिर,
कौन सा सहर शोरोगुल से मुक्त मिलेगा काफिर।

मस्त रह्ने दो जिन्दगी की चाल,
मत बनायो इसको तनाव से भरी डाल।

आज देख मुसाफिरो की भीड सड्क पे,
ख्याल आया क्यो भाग रहे है यह अकड के।

8 Comments

  1. Dr Chhote Lal Singh Dr C L Singh 03/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/08/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 03/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/08/2016
  5. mani mani 03/08/2016
  6. mani mani 03/08/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/08/2016

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