खिड़की खुली

अर्ज किया हैं
खिड़की खुली जुल्फें गिरी
सामने हुस्न का दिदार था
वाह वाह…………
फ़िर क्या ?

फ़िर क्या जुल्फें हटी किस्मत फूटती
वो नहाया हुवा सरदार सरदार था !
…….ओन्ली फोर स्माल…..

6 Comments

  1. Kajalsoni 03/08/2016
    • RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR RAMAN 04/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 04/08/2016
    • RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR RAMAN 04/08/2016
  3. babucm C.m.sharma(babbu) 04/08/2016

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