अभी भी मेरी आंखों में

कदम हैं अब भी हरकत में कहीं ठहरा नहीं हूं मैं,
यक़ीनन टूट चुका हूं मगर बिखरा नहीं हूं मैं l

अभी भी आईने में खुद को अक्सर ढूढ लेता हूं,
सुनो ऐ गर्दिश-ए-हालात बस चेहरा नहीं हूं मैं l

अभी भी मेरे दम से ही मेरी परवाज़ होती है,
कभी रहम-ओ-करम पर आज तक फहरा नहीं हूं मैं l

अभी भी मेरी आंखों में मुहब्बत डूब सकती है,
तुझे ऐसा क्यूं लगता है कि अब गहरा नहीं हूं मैं l

मेरी गर मौज निकली तो तेरा सब डूब जायेगा,
मैं “सागर” अब भी “सागर” हूं कोई सहरा नहीं हूं मैं ll

सहरा=रेत का मैदान/रेगिस्तान

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-Er Anand Sagar Pandey

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  2. सोनित 02/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/08/2016
  5. babucm C.m.sharma(babbu) 03/08/2016

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