फटे कफन-सी काया अपनी

फटे कफन-सी काया अपनी

अंत समय तक अपनी लाशें
अपने काँधों रखना है।
फटे कफन-सी काया अपनी
बड़े जतन से रखना है।

सिन्दूर सुहागिन साँसों का
पुछने मिटनेवाला है
चमकीली चोली चुनरी पर
कफन चढ़ाये जाना है

आँसू की डोली में बैठी
दुल्हन बहुत सजाना है
अंत समय तक अपनी लाशें
अपने काँधों रखना है।

जर जर साँसें थकी-थकी हैं
जाने कब तक चलना है
माटी में मिलने के डर से
डरते डरते चलना है

चलते चलते बैसाखी को
त्याग किनारे रखना है
अंत समय तक अपनी लाशें
अपने काँधों रखना है।

दुर्गम पथ है] दुर्बल पग है]
सोच समझकर चलना है
और पिघलकर आँसू बनकर
अंत समय तक सहना है

पीड़ा के अक्षर चुन चुनकर
जीवन गाथा लिखना है
अंत समय तक अपनी लाशें
अपने काँधों रखना है।

माया ममता मोह त्याग का
अभ्यास निरंतर करना है
और अकेले कंटक पथ पर
खुद को रोंधे चलना है

घायल साँसों के दम पर ही
आगे कदम बढ़ाना है
अंत समय तक अपनी लाशें
अपने काँधों रखना है।

जिन कदमों के धूल कणों से
आँखें अंधी होना है
उन कदमों को आगे रखकर
अंधे कदमों चलना है

उलटी साँसों की गिनती भी
जैसे तैसे करना है
अंत समय तक अपनी लाशें
अपने काँधों रखना है।
——- भूपेन्द्र कुमार दवे
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4 Comments

  1. RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR 02/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/08/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/08/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 03/08/2016

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