सरहद पार………..मनिंदर सिंह “मनी”

मुझे तो ऐसा नहीं लगता, नफरत की लौ,
जहर की खेप सरहद पार से आ रही है,
बड़ी हो औलाद मेरी, बुढ़ापे का सहारा बनेगी,
यही आस किसी अब्बू को उम्रदराज बना रही है,
उलटे तवे पर ही सही,किसी अम्मी के हाथो की,
रोटियां अपने बच्चो की भूख मिटा रही है,
लिख उलटी दिशा में किसी काजी की कलम,
प्यार, सदभाव, का हर रोज पाठ पढ़ा रही है,
भाईजान साथ मेरे, बेफिक्र हो, कोई बहन,
अपनी ख्वाहिशो को बेइंतिहा पंख लगा रही है,
उम्मीदों का दामन लिए, पडोसी मुल्क में भी,
हर जिंदगी अमन, प्यार का गीत गुनगुना रही है,
सब कुछ मेरे मुल्क जैसा, वही हवा में ख़ुशबो,
वही धरती सीना अपना फाड़ अनाज उग रही है,
फिर ख़ौफ़ का मंजर, जलते घर, मरते लोग,
हमारी खुशियो को किस की बुरी नज़र खा रही है,
है कुछ आतंकी संगठन दोनों मुल्को में, क्यों नहीं ?
उनके ठिकाने सियासत बर्बाद कर रही है,
बना ली मिसाइले, विध्वंशक, विनाशक, जब चला ही,
नहीं सकते, क्यों मीडिया डंका बजा कर शौर मचा रही है ?
ना किसी का दर्द, ना किसी की ख़ुशी अहमियत रखती,
पडोसी मुल्को को ऐ “मनी” उनके अपनों की गन्दी नज़र खा रही है,

18 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 02/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
  3. ALKA ALKA 02/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
  5. Kajalsoni 02/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 02/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
    • mani mani 03/08/2016
  8. babucm C.m.sharma(babbu) 03/08/2016
    • mani mani 04/08/2016

Leave a Reply