आत्मा की पहचान

वाह रे आत्मा
तूॅ कितना निश्चित है
कितना सरल
और कितना गंभीर है।
कौन पहचानेगा तुझे
कोटी-कोटी आत्माओं का
कौन करेगा विश्लेशन
तेरे रूपांतरन का
कौन लेगा हिसाब।
तूॅ अजर-अमर और महान है
हर जगह तेरी पहचान है
तूॅ सत्य-शिव और सुन्दर है।
कुछ निश्चित
कुछ भटकती अनिश्चित आत्मायें
क्यों तड़पती है निरूत्तर।
चैरासी लाख योणियों में
भटकने वाला
देता है एक जीवन
मृत्यु का अभिशाप।
जन्म लेकर बनता है
मानव का स्वरूप
ज्ञान की कुन्जी
और खुलती है
बंद किस्मत का ताला।
एक निश्चित अंतराल में
बंध जाता है
भूत-भविष्य और वर्तमान।
आत्मा का लेखा-जोखा
इन्हीं कालोें में विलिन होकर
रह जाता है।
मानवता-आदर्श-सहानुभूति
सत्य-न्याय-अहिंसा
इन तीन शब्दों में
सिमट जाती है जींदगी।
मानव का रंग-रूप-दशा
बदल जाता है इन्हीं ख्यालों में
बन जाता है काई
शैतान- दानव या एक अच्छा मानव।
विलुप्त होकर न जाने
कहाॅ रह जाती है आत्मा
बदल जाती है काया।
एक अकल्पित शरीर
कभी यह मानव आत्मा
कभी दुष्ट आत्मा
कभी महात्मा
और फिर परमात्मा।
सभी आत्माओं का
जन्म देने वाला
वाह दे आत्मा
तूॅ कितना महान और
कितना निश्चित है।

बी पी शर्मा बिन्दु

14 Comments

  1. mani mani 02/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 02/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 02/08/2016
  2. Kajalsoni 02/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 02/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 02/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 02/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 03/08/2016
  5. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 02/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 03/08/2016
  6. babucm C.m.sharma(babbu) 03/08/2016
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma (bindu) 04/08/2016

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