करूं अर्चना-वंदना मैं -रामबली गुप्ता

महाभुजंगप्रयात सवैया

करूं अर्चना-वंदना मैं तुम्हारी, 
महावीर हे ! शूर रुद्रावतारी!

कृपा-दृष्टि डालो दया दान दे दो, 
बढ़े बुद्धि-विद्या बनूं सद्विचारी।।

हरो दीनता-दुःख-दुर्भाग्य सारे, 
तुम्हीं नाथ हे! लाल-सिंदूरधारी!

सदा हाथ आशीष का शीश पे हो, 
यही प्रार्थना हे! महाब्रह्मचारी।।

रचना-रामबली गुप्ता

शिल्प-आठ यगणों की आवृति(१२२×८), यति चार यगणों पर तथा चारों पदों में तुकांतता।
जैसे-
यमाता यमाता यमाता यमाता,
यमाता यमाता यमाता यमाता।

जय बजरंगबली

15 Comments

    • रामबली गुप्ता 02/08/2016
    • रामबली गुप्ता 02/08/2016
  1. mani mani 02/08/2016
    • रामबली गुप्ता 02/08/2016
  2. Kajalsoni 02/08/2016
    • रामबली गुप्ता 02/08/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/08/2016
    • रामबली गुप्ता 02/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/08/2016
    • रामबली गुप्ता 02/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 02/08/2016
    • रामबली गुप्ता 02/08/2016
  6. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 03/08/2016

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