एक खेल ज़िन्दगी का

एक कदम की दूरी पर हमेशा ज़िन्दगी खड़ी होती है ,,,,
मैं कदम बढ़ाता हूँ उसे छूने को ,,,
और वो एक कदम पीछे हो जाती है ,,,
हर कदम पर उम्मीद होती है उसे छूने की,,,,
पर मेरे हर कदम पर वो मुझसे एक कदम दूर हो जाती है ,,,,
बरसो से ये खेल ज़िन्दगी मेरे साथ खेल रही है,,,,
मैं हर कदम पर उस से हार रहा हूँ,,,,
और वो हर कदम पर मुझसे जीतने का जश्न मना रही है।

see: https://touchmydil.blogspot.in/

5 Comments

  1. mani mani 02/08/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/08/2016
  4. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 03/08/2016

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