कोई बात पुरानी याद आयी

ठंडी हवा के झोंकों सी
इक अद्भुत कहानी याद आयी
बैठे तारों की छांव में
कोई बात पुरानी याद आयी
महकती थी रात की रानी
वो रात सुहानी याद आयी
जवाँ था हर नज़ारा भी
था चाँद खिला खिला सा
बिखर गयी थी बदली भी
था समां धुला धुला सा
नमी मिट्टी की
कुछ कह रही थी
महक बूंदो की
अब भी बह रही थी
जादू था जाने कैसा
मौसम का चल रहा था
थी याद बीते दिनों की
बस दिल मचल रहा था
मदहोशी का आलम
हमें सता रहा था
खोय २ थे हम भी
कोई सपना सजा रहा था
उतर जाते हैं कुछ नज़ारे
दिल में यूँ
जादू उनका कभी
कम होता नहीं
मूंदी पलकों में
विचरते रहते हैं
असर उनका
कम होता नहीं
मन तो है समंदर की तरह
संजोये है यादें कैसी कैसी
कुछ उड़ा ले जाती हैं
चैन दिल का
कुछ भिगो जाती हैं
दामन कभी कभी
है ज़िन्दगी इक करिश्मा
कोई तिल्सिम हो ऐसे
है जुड़ा सासों से हर पल
न आएं तो
मिट जाए जीवन जैसे

18 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  2. RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR 01/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 01/08/2016
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 01/08/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 02/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 02/08/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 02/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 02/08/2016
  6. mani mani 02/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 02/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 02/08/2016
  7. Kajalsoni 02/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 02/08/2016
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/08/2016
  9. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 02/08/2016
  10. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 03/08/2016
    • kiran kapur gulati kiran kapur gulati 04/08/2016

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