बता न?

शोर मचाकर नहीं
चुपके से आना
ए चांद
मेरे मुंडेरे पर
पूछूंगा
तेरा धर्म।
खुशियाँ बांटते हो
ईद में
कौमुदी में
अमृत की बरसात
और
करवा चौथ पर
तोडवाते हो
सुहागन का व्रत।
बता न चांद
धार्मिक नजरों ने
बांट रखी
हर चीजें
फिर
तू क्यों न बंटा
आज तलक!!!

5 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 02/08/2016
  3. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 03/08/2016

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