‘गुलाब’

फूलों के दर्द को किसी ने नहीं समझा है,
लोगों ने उन्हें सिर्फ मुस्कुराते हुए देखा है,
ये फूल गम में भी मुस्कुराने की फिजा रखते हैं,
हमने तो इन्हें काँटों में भी खिलते हुए देखा है ।

अपने वजूद को इन्होंने बचाकर रखा है,
खुद टूटकर दो दिलों को मिलाकर रखा है,
बिखेरते है,खुशबू दो दिलों के बीच,
इसलिए प्रेमियों ने इनका नाम
‘गुलाब’ रखा है ।।
-आनन्द कुमार

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 02/08/2016
  3. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 03/08/2016

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