मुलायम जी अब करो आगे अपना परिवार

बुलंदशहर की घटना से आहत, तथा up की मौजूदा हालत से व्यथित हो, मेरी कलम से ये पंक्तियाँ निकल ही पड़ी–

“करो आगे अपना परिवार”

भतीजे, चाचा को उपहार,
मुलायम की गलती का प्यार,
हवस की भूख रेंगती आज
सड़क पर ले विशाल आकार,
सुनो हे सत्ता के सरदार,
बड़ा दुष्कर्मों का व्यापार,
नहीँ सह सकती अब आवाम,
करो आगे अपना परिवार

नपुंसक वर्दी होती रोज,
भैंस आज़म की लेती खोज,
गलतियां हो जातीं हैं माफ़,
बुलंदी-शहर दे रहा भोज,
बढ़ रही हत्याओं का दौर,
नीतियां तुष्टिकरण की और,
नही सह सकती अब आवाम,
करो आगे अपना परिवार

बड़ा जेहादी स्वर का राग,
लग रहा मानवता पर दाग,
कहीँ पर कैराना से कृत्य,
कहीँ पर जला जवाहर बाग,
बढ़ा जाली टोपी का जाल,
जला कुशवाहा दीनदयाल,
नहीँ सह सकती अब आवाम,
करो आगे अपना परिवार

हो रहे धेनू वंश हलाल,
नहीँ पर तुमको हुआ मलाल,
उतारें यहाँ कसाई रोज़,
दीन इंसानों की भी खाल,
उजड़ता जलता हरित प्रदेश,
बढ़ा घर-घर वीभत्स कलेश,
नहीं सह सकती अब आवाम,
करो आगे अपना परिवार

किया यूपी का बंटाधार,
मचा है चहुंदिस हाहाकार,
नहीँ रह सकता अब मैं मौन,
दे रहा हूँ तुमको ललकार,
बने बैठे सत्ता पर बोझ,
करूँ मैं अब क्यों ना स्वर ओज,
गलतियों को भी दे दो हार,
करो आगे अपना परिवार
करो आगे अपना परिवार

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016

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