‘क्या लिखूँ?’ हाइकु _अरुण कुमार तिवारी

द्रवित मन
जो लिखता हाइकु
कहाँ से लिखुँ

बुलन्दशहर
जिसकी पहचान
थोड़ी धूमिल

है कराहता
एक अनहोनी से
बढ़ी तड़प

ये व्यभिचार
सीधी हैवानियत
बड़ा कलंक

हैं शर्मशार
निर्माता खुद पर
धत इंसान

उल्टा क़ानून
टोपी ऊपर टोपी
उल्टे जवाब

नारी सुरक्षा
खेल सियासत का
मैं ही महान

मेरी दूकान
ऐसा मेरा नेतृत्व
सबसे बढ़िया

नहीं ,मैं अच्छा
जिताओ इस बार
दूँगा सुरक्षा

पीड़ित आँखें
तकती न्याय द्वार
ये देर क्यों

ऐसा जहान
कहाँ इंसानियत
जला दो इन्हें

-‘अरुण’
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16 Comments

    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  3. mani mani 01/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  5. Kajalsoni 01/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  6. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 01/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 01/08/2016
    • अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 02/08/2016

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