झूठी ख्वाहिश……………………….मनिंदर सिंह “मनी”

विकास की राह पर चल पड़े हम,
बढ़िया जिंदगी की चाह लिए जी रहे हम,
दिन रात एक ही ख्वाब लिए, अपनों के,
बीच, अपनों से दूर, बेखबर जी रहे हम,
हो ना कमी महसूस हमारी, बच्चो को,
यंत्रो की विनाशक सौगात दे रहे है हम,
छोटे से घर में, छोटा सुनसान सा कमरा,
अपनी शर्तो पर जीने के लिए दे रहे है हम,
चंद पल नहीं अपनी औलाद के लिए, छोड़,
बाई के सहारे, लोगो में बेइंतिहा हँस रहे हम,
सारे दिन की थकावट को, मासुमो के सामने,
अधिया कभी बोतल पी उतार रहे हम,
देख ले कभी, पूछ ले कभी उनसे उनकी भी,
अपनी ही हिदायातो का जोर दिखा रहे हम,
अपनी संस्कृति, अपना इतिहास, क्या बताये?
भौतिक बातों की ओट में खुद भूल रहे हम,
फ़र्ज़ों के डर से, अपने स्वार्थ के लिए, हर रोज,
माँ-बाप को संतापो का उपहार दे रहे हम,
बिना सोचे आने वाले कल के लिए, बबूल बीज,
आम खाने की झूठी ख्वाहिश में जी रहे हम,
विकास की राह पर चल पड़े हम,
बढ़िया जिंदगी की चाह लिए जी रहे हम,

16 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 01/08/2016
    • mani mani 01/08/2016
    • mani mani 01/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
    • mani mani 01/08/2016
  3. babucm babucm 01/08/2016
    • mani mani 01/08/2016
  4. Kajalsoni 01/08/2016
    • mani mani 01/08/2016
  5. ALKA ALKA 01/08/2016
    • mani mani 01/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/08/2016
    • mani mani 01/08/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 01/08/2016
    • mani mani 02/08/2016

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