सुहानी धूप

सुहानी धूप

सूर्य की धूप ने
घेरा है मुझको कुछ ऐसे
जैसे बल्लरी लिपटी हो
किसी आम के पेड़ से।
बल्लरी की भांति बन प्रेमिका
लिपट गई है यह मुझसे ।
हवा के झोकांे के साथ
उलझ जाती है जिस्म से
फिर जैसे संयम धारण कर
अलग हो जाती है मुझसे
सूर्य की धूप ने
घेरा है मुझको कुछ ऐसे।
या फिर कभी जो आएं
बादल इसके मध्य में
कुछ छलक ही जाती है
बादल रूपी आंचल से
आकर तन को ऐसे छूती
कोमल गर्म स्पर्श हो जैसे,
सूर्य की धूप ने
घेरा है मुझको कुछ ऐसे।
-ः0ः-