नशा………१

नशा दौलत का जब सर चढकर बोलता है
हर एक शै: को कागजी टुकडो से तोलता है
कर देता है कत्ल जहन से सब जज्बातो का
इंसानियत को भी अपने पैरो तले रौदंता है ।।



डी. के. निवातियॉ________@

20 Comments

    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  1. C.M. Sharma babucm 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  2. Kajalsoni 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  3. ALKA ALKA 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  5. RAVINDRA KUMAR RAMAN RAVINDRA KUMAR 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  7. mani mani 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  8. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 01/08/2016
  9. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016
  10. sarvajit singh sarvajit singh 01/08/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/08/2016

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