जीने की होड, मैं चला छोड़…

एक परदेशी जो अपना घर-परिवार चलाने को कुछ पैसे कमाने को घर से मिलो दूर काम करता है, एक दिन अचानक से उसे पता लगता है कि उसके पिता जी की तबियत बहुत खराब है, वह तुरन्त घर को पहुचता है, कुछ दिन के देख-भाल के बाद उसके परिवार वाले उसे वापस काम पर जाने को कहते हैं क्योकि उसे रोज Office से Call आ रहा होता हैं, पिता चाहते हुए भी उसे रोक नही पा सकते थे, जैसे ही वह परदेश पहुचता है अगले ही दिन उसे पता चलता है कि उसके पिता जी नही रहे उनका स्वर्गवास हो चुका होता है|

शायद पुत्र के मन में उस समय यही लाइने गुंज रही होंगी..

काश! तुमने हाथ तो बढ़या होता
मुख से ना ही सही, मन से ही आवाज लगाया होता
छोड़ देता, हर काम-काज मैं अपना
ये आखरी मुलाकात है, जो किसी ने भी बताया होता.!!

पिता के मन की कुछ लाइने, पुत्र के लिए:

जीने की होड, मैं चला छोड़
मेरे अर्थी को कन्धा लागा जाना
जोडकर रखना रिश्ते-नातो को
मेरे जाते ही ना सबकुछ भूला जाना !

5 Comments

  1. babucm C.m.sharma(babbu) 31/07/2016
    • Prince Seth Prince Seth 31/07/2016
    • Prince Seth Prince Seth 01/08/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/07/2016

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