फिर आज़मायेगे

फिर आज़मायेगे ..

हाँ उन्ही रास्तो को फिर आज़मायेगे
भटकते गलीयो को फिर से सजायेगे !!

वक्त हो तेरी कमी हो फिकर नहीं
जलती धुप सी इससे फिर जल जायेगे
तेरी उम्मीद ही सही हम चल पायेगे
हाँ उन्ही रास्तो को फिर आज़मायेगे !

चाहत हो तेरी हसी हो फिकर नही
उठते तूफान सा इससे फिर निपट जायेगे
तेरी उम्मीद ही सही हम दौड़ पायेगे
हाँ उन्ही रास्तो को फिर आज़मायेगे !

आखरी हो तेरी नमी हो फिकर नही
मंज़िल गुम सी इससे फिर कुरुक्षेत्र मे जीत जायेगे
तेरी उम्मीद ही सही हम जित ही जायेगे
हाँ उन्ही रास्तो को फिर आज़मायेगे !

हाँ उन्ही रास्तो को फिर आज़मायेगे
भटकते गलीयो को फिर से सजायेगे !!

…..रीना बघेले

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