भोले-वन्दना …डा श्याम गुप्त

भोले-वन्दना — सावन मास शिव-शम्भु का मॉस कहा जाता है प्रस्तुत है सावन मास में भोले वन्दना —-1010498_552196531489375_187415643_n

iv-  -1(1)
१.
—-लयबद्ध षटपदी अगीत छंद में —-

आदि-शंभु-अपरा संयोग से,
महत्तत्व जब हुआ उपस्थित;
व्यक्त रूप जो उस निसंग का |
लिंग-रूप बन तुम्हीं महेश्वर,
करते मैथुनि-सृष्टि अनूप;
करूँ वन्दना, पुष्पार्पण कर ||

२.
—दोहा छंद में —-

अन्धकार को चीरकर, ज्ञानालोक बहाय |
निर्गुण शिव जब सगुन हों, सो सावन कहलाय |

चित का घडा बनाय के,देंय भक्ति रस डाल |
मन-वृत्ति के छिद्र सौं, जल की धारा ढाल |

काम क्रोध से क्षत नहीं, मन अक्षत कहलाय |
चरणों में शिव शम्भु के निज मन देंय चढ़ाय|

व्यसनों का अर्पण करें, भोले मुक्ति दिलाएं |
भंग धतूरे रूप में शिव पर देंय चढ़ाय |

अंधकार अज्ञान को, मन से देयं भगाय,
महाकाल आराधना, तब सार्थक हो पाय |

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2016
    • डा श्याम गुप्त 05/08/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 30/07/2016
    • डा श्याम गुप्त 05/08/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 31/07/2016
    • डा श्याम गुप्त 05/08/2016

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