धर्म

तिजारत बनाया है धर्म को अब इन्सानियत खत्म करके।.
कानुन को धर्मो के रखदिया है अपनी मिलकीयत बना करके।
ऱखवाले न रहे धर्म के मौजकर रहे है आज सब ठेकेदार बन करके।.
खुदी को संभलना पडेगा कल्युग मे न आयेंगे भगवान इन्सान बन करके।. (अशफाक खोपेकर)

5 Comments

  1. mani mani 30/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  3. babucm babucm 30/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2016

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