हौंसला

Hausala

दो किनारों के बीच नदी की धार होती है,
डुबा दे जो कश्ती को वो मझधार होती है,
चीरकर बहती धारा को जो बढ़े मंजिल पर,
नहीं दूरी जो उनके लिए आर-पार होती है ।

डरते हैं जो काँटों से वो फूलों को चूमेंगे क्या,
नाचता मयूर सावन में देख भी वो झूमेंगे क्या,
हौंसले को मारकर जिंदगी की राह जो चलते,
दुनिया तो बहुत दूर वो दिल में भी ढूंढेंगे क्या ।

आँधियों में भी कुछ दिए जलते हुए दिख जाते हैं,
शिखर से गिरनेवाले भी हौंसले से टिक जाते हैं,
कलम की तलवार पकड़ते हैं जो अपनी हाथों में,
मरते-मरते भी वो सत्य की कथा लिख जाते हैं ।

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com

18 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 30/07/2016
  2. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 30/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  4. mani mani 30/07/2016
  5. Kajalsoni 30/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2016
  7. sarvajit singh sarvajit singh 30/07/2016
  8. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 30/07/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016

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