बढ़े चलो

ये मसाले है,मसल के इनको तुम चलो,
ये ज़लज़ले है,जला के इनको तुम चलो।

ये हवा उड़ी है,उड़ाने को तुम्हें,
ये लहर चली है,हिलाने को तुम्हें।

सके ना कोई रोक,ऐसा एक शस्त्र हो,
ना हाथ कोई अस्त्र हो,ना पास कोई वस्त्र हो।

बढ़े चलो बढ़े चलो,मिलेगें तुमको रास्ते,
इसी वक़्त ना सही, मग़र मिलेगें आस्ते।

ये जंगी लोहे है,लोहा लेते तुम चलो,
ये खुरदरे रास्ते है,रास्ता बनाते तुम चलो।

ये दरिया है,दरियादिली दिखाते तुम चलो,
ये ठहराव है,टकराव बनकर तुम चलो।

चले चलो बढ़े चलो,मिलेगें तुमको रास्ते,
इसी वक़्त ना सही, मग़र मिलेगें आस्ते।

___रवि यादव ‘अमेठीया’___
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14 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • Ravi Yadav Ravi Yadav 30/07/2016
  2. C.M. Sharma babucm 30/07/2016
    • Ravi Yadav Ravi Yadav 30/07/2016
  3. mani mani 30/07/2016
    • Ravi Yadav Ravi Yadav 30/07/2016
    • Ravi Yadav Ravi Yadav 30/07/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  5. Kajalsoni 30/07/2016
    • Ravi Yadav Ravi Yadav 30/07/2016

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