“पत्नी चालीसा “

जय जय जय हो पत्नी महारानी ,
अपने घर की तुम हो रानी ।

बिन पुछे काम अगर कर कोई ,
तुम बन जाती जगदम्बा काली ।

शेर बन पति जो बाहर घूमे,
हर आकर वो भी चुहा बन जावे ।

झीक झीक करके पति को तुम हो सताती,
बार बार रुठ मायके चली जाती ।

हजार झुठ बोल फिर पति मनाता ,
शाम सबेरे तेरे गुन गाता ।

माता-पिता से फटकार भी खाता ,
जोरु का गुलाम वो कहलाता ।

जिस दिन हाथ मे बेलन आवे ,
उस दिन पति खुब पछतावे ।

मन इच्छा शापिंग तुम हो करती ,
फटा पाकिट तुम फिर पति का सिलती ।

सिंगार तुमको बहोत है भाता ,
ब्यूटी पार्लर तुम से ही चल जाता ।

जिस दिन पति कुछ न बोल जाता,
घर के भूकंप से फिर मोहल्ला हिल जाता ।

जिस घर मे है वास तुम्हारा निराला,
फिर न चल सके कोई गड़बड़ घोटाला ।

जो यह पत्नी चालीसा नित दिन गावे ,
उस घर मे सुख समृद्धि आवे । ।

“प्रेम से बोलीये पत्नी महारानी की जै ”

“काजल सोनी ”

( नोट : कृपया इस रचना को अन्यथा न ले तथा कोई भी गलती के लिए माफ करे )

20 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
      • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  2. C.M. Sharma babucm 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2016
  4. Kajalsoni 30/07/2016
  5. mani mani 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
  6. sarvajit singh sarvajit singh 30/07/2016
  7. Kajalsoni 30/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
  9. Kajalsoni 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
  10. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 30/07/2016
  11. Kajalsoni 30/07/2016
  12. RAJ KUMAR GUPTA RAJ KUMAR GUPTA 31/07/2016
  13. Kajalsoni 31/07/2016

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