शून्य के बीज

शून्य के बीज
********************
जीवन में
मुझे मिला शून्य

हासिल स्वीकार कर
शून्य को
काट कर खा लिया
फल की तरह

काटने पर
शून्य में निकले थे
कुछ कड़वे सख्त बीज
जिन्हें मैं
चाहकर भी खा न पाया

कोई और
खा न सके उन्हें
इसलिए उनको
गाड़ दिया ज़मीन में

गाड़ तो दिया
पर नहीं जानता था
शून्यफल के बीजों को
ज़मीन में गाड़ने का फल

समय आने पर
उनमें फूटते चले गये
शून्य अंकुर
शून्य पल्लव
शून्य डाली
शून्य पत्र
शून्य तना
शून्य पेड़
शून्य फूल
शून्य फल

शून्यफल भी
एक दिन पक कर
स्वतः ही फूट गए

उनमें से निकल कर
चारों ओर बिखर गये
शून्य के ही बीज

बीज से बीज बनना
कुदरत का अटल नियम

शून्य का हासिल
युग बीतने पर भी
रहता है शून्य हीǃ
********************
-गुमनाम कवि (हिसार)
********************

8 Comments

  1. mani mani 29/07/2016
    • Gumnam Kavi 30/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • Gumnam Kavi 30/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
    • Gumnam Kavi 30/07/2016
    • Gumnam Kavi 30/07/2016

Leave a Reply