बरसात निंगोड़ी….

क्या करूँ मैं इस बरसात निंगोड़ी का,
अपनी तो ऐसी बैरन हुई, जी जान से बैर निभावे है !
जब बरसे है झूम झूम, …………..!
तृप्त होता सृष्टि का रोम रोम ….!
एक हम ही दुश्मन इसके…………!
जब पड़े बूँद गात पर, जिया में आग लगावे हैं !
तड़पे है तन बदन ऐसे ….!
बिन पानी मछली जैसे …!
सारे जग से प्रीत करे, कम्बखत हमसे अच्छा बैर निभावें है !!
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डी. के. निवातियाँ ____!!!

18 Comments

    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  2. mani mani 29/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  3. Kajalsoni 29/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  4. babucm C.m.sharma(babbu) 29/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  5. sarvajit singh sarvajit singh 29/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  7. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 30/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
  8. Dr Chhote Lal Singh Dr C L Singh 30/07/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016

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