मेरी सोच

मेरी सोच
वक़्त और हालात मैं नही बदल सकता ,
और ना ही भाग्य का लिखा।
मैंने तो सिर्फ अपनी सोच बदली ,
बाकि सब अपने आप बदल गया।
और दोस्त कहने लगे “शीतलेश बदल गया”।
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तेरी और मेरी दास्ताँ भी कितनी अजीब है।
बयां करने जो बैठा अल्फाज़ो ने साथ छोड़ दिया।
सोचा लिख कर ही बतायेंगे अपने अफ़साने।
कोरे कागज़ ने ही सब कुछ बयां कर दिया।
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शीतलेश थुल !!

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/07/2016
  2. C.M. Sharma babucm 29/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 01/08/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 01/08/2016
  4. mani mani 29/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 01/08/2016
  5. Kajalsoni 29/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 01/08/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 01/08/2016

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