बदला सावन………..मनिंदर सिंह “मनी”

देख दूर से बारिश की बूंदे. सोचा,
जवानी के सावन का अहसास लिख दू,
पर सोच जिया नहीं जिस पल को,
उसे लफ़्ज़ों में पिरो कैसे लिख दू ?
चल दिया भीगने के लिए, खोये,
बचपन को जिन्दा कर लिख दू,
भीग मुद्दतो बाद, सावन पर,
बहकती, मुस्कुराती गजल लिख दू,
रखे कदम घर से बहार, मिला,
कड़वा अनुभव सोचा लिख दू,
मुह पर पड़ती बूंदो में, जहरीला सा,
गैसों का स्वाद सकूँ देता लिख दू,
लगभग सड़के सुनसान, भीगने के,
डर से घरो में बैठे लोग लिख दू,
जमा हुआ पानी हर तरफ, डेंगू,
मलेरिया होने का खतरा लिख दू,
मिले कुछ लोग भीगते मजबूरी में,
उनके माथे की शिकन लिख दू,
फसी मिली कुछ गाड़िया पानी में,
मजबूर हो धक्का लगाना लिख दू,
पड़ गयी बारिश हद से ज्यादा,
बर्बाद फसल देखता किसान लिख दू,
ललचायी नज़रो से देखना भीगते,
किसी बाला का बदन लिख दू,
कोई झूला डाल झूले, राह देखती,
पेड़ की शाखाओ का इंतज़ार लिख दू,
महकती ख़ुशबो पुड़ो और खीर की,
गुजरे ज़माने की बात लिख दू,
डूबे अंधविश्वाशो में लोगो को,
पानी में टोटका करते लिख दू,
बदला जर्रे-जर्रे का मिजाज,
ऐ “मनी” चल बदला सावन लिख दू,

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/07/2016
    • mani mani 29/07/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
    • mani mani 29/07/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 28/07/2016
    • mani mani 29/07/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/07/2016
    • mani mani 29/07/2016
    • mani mani 29/07/2016
    • mani mani 29/07/2016
  5. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 29/07/2016
    • mani mani 29/07/2016
  6. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 29/07/2016
    • mani mani 29/07/2016

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