जिंदगी

Sheetpoor
मेरी जिंदगी भी एक नाटक की तरह हो गयी ।
मेरे संघर्ष का तमाशा देख मेरी असफलताओं पर ताली बजाते है लोग।
थकान से चूर बीच रास्ते गिर जाता मैं जब भी।
धक्का दे देकर किनारे लगा जाते है लोग।
भूखा-प्यासा खाली पेट सोता मैं जब भी।
बांसी रोटी के नाम पर सिर्फ सहानुभुती दे जाते है लोग।
सहारा लेने हाँथ बढ़ाता अपने मैं जब भी।
चंद सिक्को की भींख देकर बेसहारा कर जाते है लोग।
शीतलेश थुल !!

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 28/07/2016
  2. mani mani 28/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/07/2016
  3. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
    • शीतलेश थुल शीतलेश थुल 29/07/2016

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