रूपे-रूपे कुरूपे गुरुदेव, बाघनी भोले-भोले

रूपे-रूपे कुरूपे गुरुदेव, बाघनी भोले-भोले ।
जिन जननी संसार दिषाया, ताको ले सूते षोले ।
गुरु षोजो गुरुदेव, गुरु षोजो ब्द्न्त गोरख ऐसा ।
मुषते होई तुम्हें बंधनि पड़िया ये जोग है कैसा ।
चाम ही चाम धसंता गुरुदेव दिन-दिन छीजै काया ।
होट कंठ तालुका सोषी काढी मिजालू षाया ।
दीपक जोति पतंग गुरुदेव ऐसी भग की छाया ।
बूढ़े होइ तुम्हे राज कमाया ना तजी मोह माया ।
ब्द्न्त गोरखनाथ सुनहु मछंदर तुम्हें ईस्वर के पूता ।
ब्रह्म झरनता जे नर राषे सो बोलो अवधूता ।।

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