वो खुदा को इस जहाँ में देखता है

वो खुदा को इस जहाँ में देखता है
और फिर वो आसमाँ भी देखता है

जो मसीहा बन रहा था दिन में वो अब
रात में कुछ क़त्ल होते देखता है

जुर्म को चुपचाप होते देख कहिए
है खुदा दुनिया में वो सब देखता है

झूठ के बाजार में सच बिक गया कल
और तू इन्साफ होता देखता है

बिक गए मोहरे सभी पैसों से लेकिन
खेलते उसको जमाना देखता है

और जो इन्साफ की खातिर लड़ा था
मंदिरों के पत्थरों को देखता है

-सोनित

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/07/2016
  3. सोनित 28/07/2016
  4. Kajalsoni 28/07/2016
  5. सोनित 28/07/2016
  6. रामबली गुप्ता 28/07/2016
    • सोनित 31/07/2016
  7. mani mani 28/07/2016
  8. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
  9. sarvajit singh sarvajit singh 28/07/2016
  10. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016

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