“तुम्हारी ऑखे “

तुम्हारी ऑखे जो शबनमी सी लगती है ।
दुर होकर मुझसे ,
इनमे कुछ नमी सी लगती है ।

क्या तारीफ करु मै इनकी ,
तुम्हारी इन ऑखो से तो ,
अंधेरी रातो मे भी रोशनी सी लगती है ।

ऑखे तुम खोलती हो और जागता मै हु ।
नजरे गुम हो जाते है मेरे ,
पलके झपकती जब तुम हो ।

गैर होकर भी इनसे कुछ दोस्ती सी लगती है ।
तुम्हारी ये ऑखे जो शबनमी सी लगती है । ।

” काजल सोनी ”

18 Comments

  1. shrija kumari shrija kumari 29/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
      • babucm babucm 30/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
      • Kajalsoni 30/07/2016
  6. mani mani 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016
    • Kajalsoni 30/07/2016

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