मारो मारो स्र्पनी निरमल जल पैठी

मारो मारो स्र्पनी निरमल जल पैठी ।
त्रिभुवन डसती गोरषनाथ दीठी ।।

मारो स्र्पनी जगाईल्यो भौरा,
जिनि मारी स्र्पनी ताको कहा करे जोंरा ।

स्र्पनी कहे मैं अबला बलिया,
ब्रह्म विष्ण महादेव छलिया ।

माती माती स्र्पनी दसों दिसि धावे,
गोरखनाथ गारडी पवन वेगि ल्यावे ।

आदिनाथ नाती मछिन्द्रनाथ पूता,
स्र्पनी मारिले गोरष अवधूता ।।

Leave a Reply