आती-जाती सांस ।

आती-जाती सांसों ने आज, फिर ललकारा आपस में,
छोड़ न दे कहीं, काम वो अपना, इतनी गहरी रंजिश में..!

ललकारना = झगड़ने के लिए भड़काना;

रंजिश = दुश्मनी;

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २६ जुलाई २०१६.

AATI-JATI SANS

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 29/07/2016
  2. C.M. Sharma babucm 28/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 29/07/2016
  3. mani mani 28/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 29/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 29/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
    • Markand Dave Markand Dave 29/07/2016

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