“मेरी तन्हाई “

मुसाफ़िर थे उन रास्तो के जो सफर चाहते रहे ।

गुमनाम गलियो मे इक हमसफर चाहते रहे ।

तुम्हे तो हमारी खबर ही न थी ,

पर जैसे चाहता है चांद अपनी चाँदनी को ,
हम तुम्हे इस कदर चाहते रहे । ।

” काजल सोनी ”

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/07/2016
    • Kajalsoni 29/07/2016
    • Kajalsoni 29/07/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/07/2016
    • Kajalsoni 29/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/07/2016
    • Kajalsoni 29/07/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 28/07/2016
    • Kajalsoni 29/07/2016
  5. babucm C.m.sharma(babbu) 28/07/2016
    • Kajalsoni 29/07/2016

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