गज़ल-दिल तेरे बिन…..

अरकान-212 212 212 212

दिल तेरे बिन कहीं अब बहलता नही।
दर्द सीने में है दम निकलता नही।।

दर्द दिल का बढ़ा जा रहा है बहुत।
दर्दे दिल पे कोई जोर चलता नही।।

सिसकियों से मेरी दिल पिघलते गए।
दिल तेरा ये भला क्यूँ पिघलता नही।।

टालता हूँ बहुत ख़्वाब तेरे सनम।
टालने से मगर अब ये टलता नही।।

काश! मिल जाए तेरा सहारा मुझे।
बिन सहारे ये दिल अब सँभलता नही।।

रचना-रामबली गुप्ता

14 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
    • रामबली गुप्ता 27/07/2016
  2. babucm babucm 27/07/2016
    • रामबली गुप्ता 27/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/07/2016
    • रामबली गुप्ता 27/07/2016
  4. mani mani 27/07/2016
    • रामबली गुप्ता 27/07/2016
    • रामबली गुप्ता 27/07/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
    • रामबली गुप्ता 27/07/2016
  6. Kajalsoni 27/07/2016
    • रामबली गुप्ता 27/07/2016

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