रात !

अंधेरों की नहीं
टिमटिमाते चिरागों की होती है रात
नींद की नहीं
सपनो की होती है रात
अलसाई बाते,
इठलाते जज्बातों
की होती है रात |
कल रात को देखा ?
देखते कैसे सो जो रहे थे,
तुम्हे कैसे पता चलेगा
की कल चांदनी की हुई थी रात |

करवटों की नहीं,
बिस्तर, तकिये, कम्बल, रजाई,
ऊंघने, खर्राटे, बुदबुदाने की
बिलकुल नहीं,
संगीत, कविता, प्रेम, अनकही बाते
विचार, आधार और कल्पनाओ
की होती है रात |
कभी रात को सुना है ?
सुनते कैसे, सो जो रहे थे
कल सितारों की कहानियो की हुई थी रात |

भुत, पिशाच, सापों, चम्कदारो
गुंडों, लूटेरो, कातिलों की
बिलकुल नहीं,
चातको, जुगनुओ, प्रेमियों, कवियों
जवानों, चौकीदारों, कुछ घावो को संजोती और आंसुओं पे पहरा देती ,
अच्छी यादों की होती है रात |
कभी रात से बात की है?
बात कैसे करते सो जो रहे थे |

कल कुछ किस्सों की हुई थी रात |

6 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 26/07/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 26/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
  5. Dr Chhote Lal Singh Dr C L Singh 27/07/2016
  6. mani mani 27/07/2016

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