आतंक–1………..मनिंदर सिंह “मनी”

आतंक आतंक आतंक आतंक आतंक,
हर तरफ विकराल रूप बना आतंक,
कहीं जेहाद, कहीं स्वराज, कहीं नया राज,
सोच लिए दुनिया को तबाह कर रहा आतंक,
बेगुनाहों को मार, उनकी जिंदगी उजाड़,
क्या साबित करना चाहता है ये आतंक ?,
किताबो की दुनिया से अभी निकले नहीं,
उन मासूम चेहरो को कैसे खा गया आतंक ?,
मासूमियत झलकती थी उनके चेहरो से,
नन्हे हाथो से क़त्ल कैसे करवा गया आतंक ?,
कहाँ तूने पढ़ाया ? विस्फोटक पाठ,
कब छीना बच्चो का बचपन बता तू आतंक ?
क्यों तेरा जोर नहीं चलता ?, बेईमानो पर,
लुटती इज़्ज़ते, भुखमरी पर चुप क्यों तू आतंक ?,
क्या तेरा मसीहा,अँधा, गूँगा, बहरा है,
बोल कुछ क्यों नहीं बोलता तू ऐ आतंक ?,

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/07/2016
    • mani mani 27/07/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 26/07/2016
    • mani mani 27/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/07/2016
    • mani mani 27/07/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
    • mani mani 27/07/2016
    • mani mani 27/07/2016
  5. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 27/07/2016
    • mani mani 27/07/2016

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