वागीश्वरी सवैया-रामबली गुप्ता

वशीभूत जो सत्य औ स्नेह के हो,
जहाँ में उसे ढूंढना क्या कहीं?

न ढूंढो उसे मन्दिरों-मस्जिदों में,
शिवाले-शिलाखण्ड में भी नहीं!

जला प्रेम का दीप देखो दिलों में,
दिखेगा तुम्हें वो सदा ही यहीं।

जहाँ नेह-निष्काम निष्ठा भरा हो,
सखे! ईश का भी ठिकाना वहीं।।

रचना-रामबली गुप्ता
शिल्प- सात यगण और अंत में एक गुरु
(लघु गुरु गुरु)×७+गुरु=१२२×७+२

19 Comments

  1. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  2. सोनित 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  5. रामबली गुप्ता 26/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  7. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/07/2016
  9. shikha nari 18/05/2017

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