पद्य-श्रीकृष्ण स्तुति-रामबली गुप्ता

मुरलीधर धर मुरली अधरन, ग्वालिंन को नचावत हो।

विश्वम्भर भर प्रेम हृदय में, राधा को रिझावत हो।

चक्रपाणि पाणि चक्र धर, तुम अधर्म मिटावत हो।

दामोदर दर-दर भटकूँ मैं, क्यों न मोहि उबारत हो?

रचना-रामबली गुप्ता

15 Comments

  1. babucm babucm 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016
  5. Kajalsoni 26/07/2016
    • रामबली गुप्ता 26/07/2016

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