दुनिया

गुलशन गुलो से आबाद है पेडो पर परिन्देा की भी सौगात है ।. कोयल की कुह से सुरीला समा चप्पे चप्पे मे छाया हुआ है ।
यादो मे सनम के मेहबुब कोई पेड से टीका हुआ है ।
कोने मे कही एक जोडा बेखबर दुनियासे लिपटा पडा है।
माहोल इसकदर एक गुलशन मे बना हुआ है। दे न दे सब का भला खहते हुए भीकारी खडा है ।
कई लोग यहॉ अपने अरमानो को पुरे किए जा रहे है ।
खाने और पीने के कई सामान यहॉ बिके जारहे है ।
कोई नशे मे धुत तो कही धुए उडाए जारहे है ।
हकीकत पुरी दुनिया की इस गुलशन मे नजर आरही है।
(अशफाक खोपेकर)

5 Comments

  1. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 25/07/2016
  2. mani mani 26/07/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/07/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 26/07/2016

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