इल्ज़ाम

मुस्लमानो पर ये बुरा इल्ज़ाम रह गया ।
मुस्लमान इसी लिए बदनाम रह गया ।
परहेजगार नमाज़ी अब न रहे मस्ज़िदों मे,
दहशतगरों के हाथ में इस्लाम रह गया ।

खून किसी का भी गिरे नस्ल-ए-आदम का खून है आखिर ।
बच्चे सरहद पार के सही किसी की छाती का सुकून है आखिर ।
ख़ून के नापाक ये धब्बे, ख़ुदा से कैसे छिपाओगे।
मासूमों के क़ब्र पर चढ़कर,कौन सी जन्नत जाओगे ।

ये हरगिज़ हरगिज़ ज़िहाद नहीं है।.
दहशत किसी मज़हब का पैगाम नहीं है।
ये कैसी इबादत ऐ कैसा जुनुन,
हमें पक्का यकीन है ये कतई इस्लाम नहीं है।. ।

खामोशी कायर बनादेंगी जागो मुस्लमानो ।.
फिरकापरस्ती छोडकर होश मे आवो मुस्लमानो ।. जाहीलो के कब्जे से आझाद करो इस्लाम को । इस्लामने दिया है और देता रहेगा मोहब्बत का पैगाम सारी दुनिया को ।.
(आशफाक खोपेकर)

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  2. mani mani 25/07/2016
  3. babucm babucm 25/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/07/2016

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