हमारा जीवन

किसी से जड़ उम्मीद मत करो
पता नहीं खरा उतर पाए या नहीं
हालातो से समजौता करना सिखा दिया
तंग हालातो मई भी जीना सिखा दिया
हम गरीबी मई पैदा हुए इसका क्या दोष
मगर गरीबी मैं मरे इसका करो अफ़सोस
मुश्किलो से लड़ना सीख लिया मैंने
सीख कर दुनिया जीत ली मैंने
कल कहा था आज आसमान छू रहा हू
लेकिन अपनी नजाकत आज भी नहीं भूला हू
सारे रिश्ते नाते दूर छूट गए
इस जिंदगी की भाग दौड़ मैं सब टूट गए
एक उम्मीद की किरण आज भी जल रही है
इस दिल मैं एक आस आज भी पल रही है

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
  2. रामबली गुप्ता 25/07/2016
  3. mani mani 25/07/2016
  4. babucm babucm 25/07/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/07/2016

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