सच्चाई नहीं मिलती….ग़ज़ल…

खुदा परस्त दुनिया में खुदा बहुत हैं खुदाई नहीं मिलती….
सच बोलने की दुहाई सब और है पर सच्चाई नहीं मिलती….

मिठाई सजी है दूकान में बहुत पर मिठास ही नहीं मिलती….
हाथों पे रंग बहुत गहरा है पर हिना की रंगाई नहीं मिलती….

माना दिल पे पहरे बहुत हैं व्यवसायी से लठदारों के..पर….
मोहब्बत के जज़्बात में वो प्यार की रोशनाई नहीं मिलती….

“बब्बू” अपना कटा दिल हाथ में लिए फिरता है..आखिर…
करे क्या गर दर्द-ऐ-दिल में पहले सी रानाई नहीं मिलती….

जब खुद ही चाहते थे बदलना तो ढोंग क्यूँ किया इतना…
“चन्दर” ग़ज़ल तेरी में अब तेरी ही परछायीं नहीं मिलती….
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/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

रानाई – grace

28 Comments

    • babucm babucm 25/07/2016
  1. Rajeev Gupta RAJEEV GUPTA 25/07/2016
    • babucm babucm 25/07/2016
    • babucm babucm 25/07/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/07/2016
    • babucm babucm 25/07/2016
  3. Kajalsoni 25/07/2016
    • babucm babucm 25/07/2016
  4. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 25/07/2016
    • babucm babucm 25/07/2016
  5. mani mani 25/07/2016
    • babucm babucm 25/07/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/07/2016
    • babucm babucm 25/07/2016
  7. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 25/07/2016
    • babucm babucm 26/07/2016
  8. Dr Chhote Lal Singh Dr Chhote Lal Singh 25/07/2016
    • babucm babucm 26/07/2016
  9. Manjusha Manjusha 25/07/2016
    • babucm babucm 26/07/2016
  10. सोनित 25/07/2016
    • babucm babucm 26/07/2016
  11. sarvajit singh sarvajit singh 25/07/2016
    • babucm babucm 26/07/2016
  12. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/07/2016
    • babucm babucm 26/07/2016

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