प्रकृति -दोहा छंद

सिंधु-शैल-सरि-नभ-धरा, तारक-रवि-सारंग।
पेड़-पुष्प-नर-जन्तु-खग, प्रकृति के सब अंग।।

महकाते खिल के सुमन, प्रकृति के हर अंग।
स्वच्छ गगन नित स्नेह का, भरता स्यामल रंग।।

मृदा-वायु-जल-वृक्ष-वन, प्रकृति की सौगात।
युक्ति-युक्त दोहन करें, सुखी रहें दिन-रात।।

प्रकृति ने सबको दिया, संसाधन अनमोल।
सौम्य-सरल दोहन करें, सुख के पट लें खोल।।

प्रकृति के सौंदर्य को, सखे! सहेजें नित्य।
धरा प्रदूषण मुक्त हो, करिये ऐसा कृत्य।।

रचना-रामबली गुप्ता

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 25/07/2016
  2. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 25/07/2016
    • रामबली गुप्ता 25/07/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/07/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/07/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/07/2016

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