गजल – बेवफा

क्यों की हमने प्यार मोहब्बत ग़र ये होना था,
पल दो पल की खुशी का सब़ब़ आख़िर रोना था.

कभी न करता महंगा सौदा ग़र मुझको होती ख़बर,
अदने से इक आस़ की ख़ातिर इतना खोना था.

दिल का रिश्ता करने से पहले कैसे भूल गया,
उसके पहले भी इस दिल को कितनों का होना था.

अपनों को भी किया पराया रहकर इस मुगालते में,
रुंह-औ-जां उसकी मेरी है अपना ही जो न था.

कैसे-कैसे ख़्वाब बुने थे ख़्वाबों ही ख़्वाबों में,
अब ये समझा ख़्वाबों को क्या ख़ाक न होना था.

प्यार की ख़ातिर कभी न जगना कर लो ये तजरूबा,
तौहीन-ए-बरोज से बेहतर हर दम सोना था.

खेला जब तक चाहा उसने दिल से तेरे ‘आशीष’,
तोड़ ही डाला आख़िर उसने दिल जो खिलौना था.

11 Comments

  1. parveenG 24/07/2016
    • poet.tanha poet.tanha 24/07/2016
  2. babucm C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
    • poet.tanha poet.tanha 24/07/2016
  3. poet.tanha Ashish Raj Singhania 24/07/2016
  4. Kajalsoni 24/07/2016
    • poet.tanha poet.tanha 24/07/2016
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/07/2016
    • poet.tanha poet.tanha 24/07/2016
  6. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/07/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/07/2016

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