मदिरा सवैया

चैन लुटा जब नैन मिले
तन औ मन की सुध भी न रही।

कोमल भाव जगे उर में
शुचि-शीतल-स्नेह-बयार बही।।

मौन रहे मुख नैनन ने
प्रिय से मन की हर बात कही।

चंद्र निहारत रैन कटें
मन की अब पीर न जाय सही।।

रचना-रामबली गुप्ता

14 Comments

  1. mani mani 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 24/07/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 24/07/2016
  3. Kajalsoni 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 24/07/2016
  4. Rinki Raut Rinki Raut 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 24/07/2016
  5. C.M. Sharma C.m.sharma(babbu) 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 24/07/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 24/07/2016
  7. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 24/07/2016
    • रामबली गुप्ता 24/07/2016

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