जिंदगी की राह में …||

जिंदगी की राह में करवट बदल रहे हैं |
आज जीने की चाहत लिए
दर-बदर भटक रहे हैं|
कहने को तो बडी़ हसी़न है, ऐ जिंदगी !
कुछ पलों के लिए गम़गीन है , ये जिदगी !
जीने की आरजू लिये ,
हम भटक रहे ना जाने कहां |
खुद को मालूम नही क्या होगा ,
आगें यहां |
इस जीवन पथ में,
फिर भी चले जा रहे चढे़ ,
मस्ती के रथ में |
आरजू तो इतनी है की सारा जहां हमारा हो |
पर ना हम खुद जहां में हैं,
ना जहां हमारा है |
जिदगी कहां ले जायेगी ,
ऐसा एक अनसुलझा सवाल जेह़न में आया,
धूप होगी या होगा घना छाया |
ये कुदरत का करिश्मा है दोस्तों
अब खुदा ही जाने कहां होगा किसका साया |
ये तो है बस जीवन माया ,
ये तो है बस जीवन माया ||